केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. बघेल शुक्रवार को उरई पहुंचे, जहां उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी द्वारा संचालित ‘अपनी रसोई’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच सहित विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 64 हजार एकड़ जमीन को भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इसकी जिलेवार सूची सार्वजनिक की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि किस जिले में कितनी जमीन कब्जामुक्त कराई गई और किन भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है और जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाएगा, वहां सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मंत्री ने कहा कि कब्जामुक्त कराई गई जमीन का उपयोग जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई केवल कानून के दायरे में की जा रही है और इसका उद्देश्य सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित कर उन्हें सार्वजनिक हित में उपयोग करना है।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले और एसआईटी जांच के संबंध में पूछे गए सवाल पर प्रो. एस.पी. बघेल ने कहा कि मामला फिलहाल जांच के अधीन है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा, “जब जांच चल रही हो, तब किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने दीजिए। कोई भी दोषी होगा तो वह बचेगा नहीं और उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।”
जब उनसे यह पूछा गया कि इस मामले में पहले चंपत राय का नाम सामने आने की चर्चा हुई थी, तो उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी का नाम लेना या किसी पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी के खिलाफ साक्ष्य मिलते हैं तो चार्जशीट दाखिल होगी और उसके बाद अदालत गुण-दोष के आधार पर निर्णय करेगी।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी द्वारा संचालित ‘अपनी रसोई’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए इस प्रकार के प्रयास प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज दोनों के संयुक्त प्रयासों से ही अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाई जा सकती है।






