Wednesday, August 26, 2026

आठ वर्षीय बेटी की हत्या के दोषी पिता को उम्रकैद, सात वर्ष बाद आया फैसला; कोर्ट ने 17 हजार रुपये का लगाया जुर्माना

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जालौन जिले के बहुचर्चित आठ वर्षीय बालिका हत्याकांड में करीब सात वर्ष बाद न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस की प्रभावी विवेचना और न्यायालय में मजबूत पैरवी के आधार पर पॉक्सो कोर्ट, उरई ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 17 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस निर्णय को पुलिस की “ऑपरेशन कन्विक्शन” मुहिम की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक जालौन के निर्देशन में मॉनीटरिंग सेल एवं कुठौंद थाना पुलिस द्वारा मामले की लगातार प्रभावी पैरवी की गई। शासकीय अधिवक्ता रन केंद्र सिंह भदोरिया ने न्यायालय में अभियोजन पक्ष का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों को पर्याप्त मानते हुए दोषसिद्धि की।

यह मामला वर्ष 2019 का है। कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम बिजवाहा निवासी लाखन सिंह ने 9 जून 2019 को पुलिस में तहरीर देकर बताया था कि उसकी आठ वर्षीय पुत्री संगीता 8 जून की शाम गांव में खेलने गई थी, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला। अगले दिन सुबह बालिका का शव गांव के बाहर मातादीन के खेत में झाड़ियों के बीच पड़ा मिला।

तहरीर में लाखन सिंह ने गांव के दो लोगों मोतीलाल और जाहर सिंह उर्फ बललवान पर पुरानी रंजिश के चलते बेटी की गला दबाकर हत्या करने और शव छिपाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने उसकी शिकायत के आधार पर हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब गांव के एक प्रत्यक्षदर्शी ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उसने लाखन सिंह को अपनी बेटी के साथ मारपीट करते देखा था। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब लाखन सिंह से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि गुस्से में आकर उसने अपनी बेटी का गला दबाकर हत्या कर दी थी। बाद में खुद को बचाने और पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए गांव के दो निर्दोष लोगों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।

पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और विवेचना पूरी कर 29 अगस्त 2019 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) राजीव सिंह ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर लाखन सिंह को दोषी ठहराया।

न्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास तथा 17 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने का अभियान लगातार जारी है, जिससे अपराधियों में कानून का भय बना रहे और पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके।

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