जालौन की जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2019 में उरई के उमरारखेड़ा में हुई एक विवाहिता की निर्मम हत्या के मामले में आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह की अदालत ने अभियुक्त जितेन्द्र कुमार, निवासी ग्राम इछौरा (थाना जरिया, जनपद हमीरपुर), को भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पूर्व के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषसिद्ध पाते हुए यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार, वादी मूलचन्द्र अहिरवार, निवासी उमरारखेड़ा (मूल निवासी ग्राम धमसेनी, थाना एट) ने कोतवाली उरई में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि उन्होंने अपनी पुत्री पूनम कुमारी का विवाह वर्ष 2013 में जितेन्द्र कुमार से किया था। दंपति की एक पुत्री भी है। वैवाहिक विवाद के चलते घटना से कुछ समय पहले पूनम अपने मायके आकर रहने लगी थी।
मुकदमे के अनुसार, घटना से एक दिन पहले आरोपी जितेन्द्र अपनी पत्नी को वापस साथ ले जाने के उद्देश्य से उरई स्थित ससुराल पहुंचा था, लेकिन पूनम ने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया। आरोप है कि 19 मई 2019 की सुबह करीब पांच बजे आरोपी छत से नीचे उतरकर पूनम के कमरे में पहुंचा और धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया। चीख-पुकार सुनकर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी वहां से भाग निकला। गंभीर रूप से घायल पूनम की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद मृतका के पिता की तहरीर पर कोतवाली उरई में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना पूरी कर 15 जून 2019 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना।
शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त जितेन्द्र कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 5,500 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में नियमानुसार अतिरिक्त दंड भुगतना होगा।
इस बहुचर्चित मामले में शासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) लखन लाल निरंजन ने प्रभावी पैरवी की। अदालत के फैसले के साथ लगभग सात वर्षों से लंबित इस हत्या के मामले का न्यायिक पटाक्षेप हो गया।






