उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बुधवार का दिन बेहद दुखद रहा। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक और बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित हुए उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे और लंबे समय से ब्रेन कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज देश के साथ-साथ अमेरिका में भी कराया गया, लेकिन कैंसर चौथे चरण में पहुंच जाने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उमाशंकर सिंह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के एकमात्र विजयी विधायक थे। उनकी पहचान पार्टी के मजबूत और प्रभावशाली नेताओं में होती थी। बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें अपना “छोटा भाई” मानती थीं। पिछले वर्ष रक्षाबंधन पर उन्होंने स्वयं उमाशंकर सिंह को राखी बांधी थी, जो दोनों के पारिवारिक संबंधों की मिसाल मानी जाती है।
उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वर्ष 1990 में वह बलिया के एएसी कॉलेज के छात्रसंघ महामंत्री चुने गए। वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष बने और 2011 में बसपा का दामन थामा। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 में लगातार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित होकर उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
राजनीति के साथ-साथ वह सामाजिक कार्यों के लिए भी चर्चित रहे। उन्होंने 2012 में 251 और 2016 में 351 हिंदू-मुस्लिम जोड़ों का सामूहिक विवाह कराकर समाज सेवा की मिसाल पेश की थी।
हालांकि, वर्ष 2017 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन और सरकारी ठेकों से जुड़े मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। बाद में उन्होंने फिर चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक वापसी की।
चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनके पास लगभग 54.05 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जबकि उन पर करीब 13 करोड़ रुपये का कर्ज था। वह निर्माण, खनन, शिक्षा और होटल व्यवसाय से भी जुड़े रहे। उनकी पत्नी पुष्पा सिंह ‘सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड’ की प्रबंध निदेशक हैं, जबकि पुत्र प्रिंस युकेश कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं। राजनीतिक गलियारों में अब प्रिंस युकेश को उनकी राजनीतिक विरासत का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है।
उमाशंकर सिंह के निधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें जनसेवा के प्रति समर्पित नेता बताया।




