लखनऊ। लगातार हो रही बारिश के बीच लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर सड़क धंसने और स्लिपेज की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जब तक एक्सप्रेस-वे पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा।
NHAI ने एक्सप्रेस-वे के निर्माण में सामने आई तकनीकी खामियों के चलते निर्माण कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी को भविष्य में NHAI की ओर से कोई नया कार्य नहीं दिए जाने का निर्णय लिया गया है। यह एक्सप्रेस-वे आगरा की पीएनसी कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था। कंपनी के मालिक भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई प्रदीप जैन हैं।
NHAI के क्षेत्रीय प्रबंधक गौतम विशाल ने बताया कि एक्सप्रेस-वे पर जहां-जहां तकनीकी खामियां सामने आई हैं, उन्हें दूर करने का पूरा खर्च निर्माण कंपनी को ही वहन करना होगा। मरम्मत कार्य पर लगभग 3 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है और यह राशि भी कंपनी से ही वसूली जाएगी।
गौरतलब है कि 26 जुलाई को एक्सप्रेस-वे के किलोमीटर-64 पर सड़क में स्लिपेज की समस्या सामने आई थी। सूचना मिलते ही संबंधित स्थान पर तत्काल मरम्मत कार्य कराया गया। इसके अलावा जिन अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार की शिकायतें मिली थीं, वहां भी लगातार सुधार कार्य जारी है।
NHAI का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए एक्सप्रेस-वे पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी मानकों के अनुरूप होने तक टोल वसूली स्थगित रहेगी। प्राधिकरण निर्माण कार्य की गुणवत्ता की लगातार निगरानी कर रहा है और सभी आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस निर्णय से फिलहाल एक्सप्रेस-वे का उपयोग करने वाले हजारों वाहन चालकों को टोल शुल्क से राहत मिलेगी। वहीं, निर्माण गुणवत्ता को लेकर NHAI के इस कड़े रुख को सड़क परियोजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




