जालौन की नगर पालिका परिषद उरई में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच को लेकर चल रहे घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है। अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति) ने संयुक्त मजिस्ट्रेट एवं उप जिलाधिकारी (न्यायिक) उरई रिंकू सिंह राही को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वह अब गठित जांच समिति के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनके स्तर से किसी भी प्रकार की जांच किया जाना अपेक्षित नहीं है।
एडीएम कार्यालय से 29 जुलाई 2026 को जारी पत्र के अनुसार, नगर पालिका परिषद उरई के कई सभासदों, जिनमें वार्ड-3 के सभासद दीपक पटेल, वार्ड-31 की सभासद मुवीना, विमला देवी सहित अन्य सभासदों तथा भाजपा अनुसूचित मोर्चा के जिला महामंत्री एवं नामित सभासद अनुज नाग द्वारा जून माह में नगर पालिका में कथित अनियमितताओं की शिकायत की गई थी।
इन शिकायतों के आधार पर जिलाधिकारी ने 18 जून 2026 को तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) को अध्यक्ष, उप जिलाधिकारी जालौन तथा लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड उरई के अधिशासी अभियंता को पदेन सदस्य बनाया गया था।

बाद में 30 जून 2026 को रिंकू सिंह राही का स्थानांतरण उप जिलाधिकारी जालौन के पद से उप जिलाधिकारी (न्यायिक) उरई के पद पर हो गया। इसके बाद जिलाधिकारी की स्वीकृति से 17 जुलाई 2026 को संशोधित आदेश जारी कर उप जिलाधिकारी जालौन के रूप में राकेश कुमार सोनी को जांच समिति का सदस्य नामित कर दिया गया।
इसके बावजूद रिंकू सिंह राही द्वारा 29 जुलाई को पत्र भेजकर पूर्व आदेश की प्रति उपलब्ध कराने और जांच संबंधी मार्गदर्शन मांगा गया था। इस पर अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच समिति में सदस्य का पद “उप जिलाधिकारी, जालौन” के रूप में निर्धारित है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर। चूंकि रिंकू सिंह राही का स्थानांतरण हो चुका है, इसलिए अब वह समिति के सदस्य नहीं हैं और उनके द्वारा जांच किया जाना अपेक्षित नहीं है।
एडीएम ने अपने पत्र के साथ 17 जुलाई 2026 का संशोधित आदेश भी संलग्न करते हुए आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी है। इस पत्र के बाद नगर पालिका उरई की जांच को लेकर प्रशासन की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।




