जालौन जिले में एक आठ वर्षीय बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के सात साल पुराने मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) राजीव सिंह की अदालत ने आरोपी जीतू (निवासी बिजुआपुर, थाना कुठौंद) को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 1 लाख 8 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उसे 6 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
शासकीय अधिवक्ता रणकेंद्र सिंह भदौरिया और विश्वजीत सिंह गुर्जर ने बताया कि यह मामला 15 मार्च 2017 का है। पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी जीतू अपने साथी संजू के साथ उनके घर आया और उनकी 8 वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। परिजनों की तलाश के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला, तो पुलिस ने जांच शुरू की। बाद में पुलिस ने बच्ची को नोएडा से बरामद किया।
बच्ची की बरामदगी के समय वह गर्भवती थी। पीड़िता ने अदालत में दिए बयान में बताया कि आरोपी उसे दिल्ली के पास पाकवूपुर गांव में रखकर महीनों तक दुष्कर्म करता रहा। इस दौरान पीड़िता ने एक बच्चे को भी जन्म दिया।
विशेष सत्र परीक्षण संख्या 46/2021 में सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 6 गवाह और ठोस साक्ष्य पेश किए। इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने जीतू को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत 7 वर्ष, धारा 366 के तहत 10 वर्ष और पॉक्सो एक्ट की धारा 5एम/6 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने आदेश में संवेदनशीलता दिखाते हुए यह भी निर्देश दिया कि दोषी पर लगाए गए 1.08 लाख रुपये के अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता और उसके नवजात बच्चे के चिकित्सा व पुनर्वास के लिए प्रदान की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।




