पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात की। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात मानी जा रही है। ऐसे समय में हुई इस बातचीत को क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे हैं। सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत संगठन के सभी 10 पूर्ण सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। इस बार सम्मेलन की थीम ‘शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर आगे बढ़ना’ रखी गई है। बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क व्यवस्था, आतंकवाद और बदलती वैश्विक परिस्थितियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया के हालात पर नजर
मोदी और पजशकियान की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई हुई है। भारत के लिए ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत लगातार पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की जरूरत पर जोर देता रहा है। वहीं, ईरान इस क्षेत्र के मौजूदा घटनाक्रम में प्रमुख भूमिका रखने वाला देश है। ऐसे में बिश्केक में मोदी-पजशकियान वार्ता पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर रही।

मध्य एशिया से संबंध मजबूत करने का अवसर
SCO सम्मेलन भारत के लिए केवल बहुपक्षीय मंच ही नहीं, बल्कि मध्य एशिया के देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। मध्य एशिया तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों के लिए इस क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।
इसके अलावा भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार और परिवहन संपर्क को भी मजबूत करना चाहता है। नए व्यापार मार्गों और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के विकास से भारत के लिए इस क्षेत्र तक पहुंच आसान हो सकती है। ईरान के जरिए मध्य एशिया और उससे आगे के बाजारों तक संपर्क भी भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।

आतंकवाद और अफगानिस्तान भी अहम मुद्दे
SCO के मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां भी सदस्य देशों के लिए चिंता का विषय हैं। भारत इन मुद्दों पर SCO के अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के दौरान कई देशों के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। ऐसे में द्विपक्षीय बैठकों के जरिए भारत अपने रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात
SCO शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान पाशिन्यान ने प्रधानमंत्री मोदी को आर्मेनिया आने का न्योता भी दिया।
भारत और आर्मेनिया के बीच हाल के वर्षों में रक्षा, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। ऐसे में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात को भी भारत की व्यापक कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रवासी भारतीयों और शिक्षाविदों से मिले मोदी
किर्गिस्तान पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने वहां भारत से जुड़े विभिन्न वर्गों के लोगों से भी मुलाकात की। इनमें प्रवासी भारतीयों के अलावा शिक्षाविद, शोधकर्ता, ITEC के पूर्व छात्र और योग अभ्यासकर्ता शामिल रहे। प्रधानमंत्री ने भारत और किर्गिस्तान के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत संबंधों को महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में आयोजित होने वाले छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। यह आयोजन किर्गिस्तान की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक खेलों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
25 साल में वैश्विक मंच के रूप में मजबूत हुआ SCO
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी। शुरुआत में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान इसके संस्थापक सदस्य थे। समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ और भारत तथा पाकिस्तान वर्ष 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद वर्ष 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस को पूर्ण सदस्यता मिली।
वर्तमान में SCO के 10 पूर्ण सदस्य देश हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, परिवहन एवं संपर्क व्यवस्था मजबूत करना और सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना है।
पाकिस्तान को मिल सकती है अगली अध्यक्षता
SCO की मौजूदा गतिविधियां संगठन के 25 वर्ष पूरे होने के महत्वपूर्ण पड़ाव के बीच हो रही हैं। यूरेशिया की सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से संगठन का महत्व लगातार बढ़ा है। मौजूदा किर्गिस्तान अध्यक्षता के बाद वर्ष 2026-27 के लिए पाकिस्तान को अध्यक्षता मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है।
बिश्केक सम्मेलन के दौरान होने वाली बैठकों और द्विपक्षीय वार्ताओं के जरिए भारत एक ओर पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थितियों पर अपने कूटनीतिक संपर्क मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर मध्य एशिया के देशों के साथ ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।







