कौशांबी/प्रयागराज। प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर सोमवार दोपहर हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में अवैध रूप से संचालित बताई जा रही पटाखा फैक्ट्री में दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पूरी फैक्ट्री मलबे में तब्दील हो गई और आसपास के मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में 8 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों का प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में उपचार चल रहा है।
धमाके के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही क्षणों में पूरा इलाका धुएं के गुबार से भर गया। तेज आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात ग्रामीणों ने बताई। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 100 मीटर के दायरे में बने आठ मकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि इनमें से तीन मकान पूरी तरह ढह गए। एक मकान की तीसरी मंजिल में विस्फोट के कारण करीब आठ फीट का बड़ा छेद हो गया।

600 वर्गफीट में चल रही थी फैक्ट्री, आसपास बस रही थी नई बस्ती
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मोहम्मदपुर गांव में करीब 600 वर्गफीट क्षेत्र में एक मंजिला पटाखा फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। पुलिस के अनुसार फैक्ट्री का संचालन आदिल नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था। जिस स्थान पर पटाखा बनाने और बारूद रखने का काम चल रहा था, उसके आसपास नई बस्ती भी विकसित हो रही थी। यही वजह है कि विस्फोट का असर फैक्ट्री के अलावा आसपास बने घरों तक पहुंचा और कई परिवार इसकी चपेट में आ गए।
हादसे के समय फैक्ट्री में करीब सात मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से तीन की मौत होने की जानकारी सामने आई है। बाकी मृतक आसपास स्थित मकानों और बस्ती के बताए जा रहे हैं। मृतकों में बड़ी संख्या में मासूम बच्चे शामिल हैं, जिससे हादसे की भयावहता और बढ़ गई।

100 मीटर के दायरे में 8 मकान क्षतिग्रस्त
विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री के आसपास करीब 100 मीटर के दायरे में बने आठ मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें से तीन मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए। एक मकान की तीसरी मंजिल में विस्फोट के कारण करीब आठ फीट का बड़ा छेद हो गया।
मोहम्मदपुर गांव प्रयागराज-कौशांबी सीमा के पास स्थित है और यहां से मनौरी एयरफोर्स स्टेशन करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है। हादसे के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं और घटनास्थल पर बचाव अभियान में जुट गईं।

बिजली का खंभा गिरने के बाद बारूद में विस्फोट का दावा
विस्फोट की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे मामले की जांच में जुटी हैं। हालांकि प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती घायल रानी ने बताया कि बिजली का खंभा गिरने के बाद फैक्ट्री में रखे बारूद में तेज धमाका हुआ। पुलिस इस दावे समेत सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है।
विस्फोट के बाद फैक्ट्री का पूरा ढांचा धराशायी हो गया। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया गया। पुलिस को आशंका है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग दबे हो सकते हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने चारपाई पर पहुंचाया अस्पताल
हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। फैक्ट्री और आसपास के इलाकों में झुलसे और घायल लोग मदद के लिए तड़पते नजर आए। ग्रामीणों ने राहत और बचाव कार्य में तत्काल हाथ बंटाया। कई झुलसे लोगों को ग्रामीण चारपाई पर रखकर सुरक्षित स्थान तक ले जाते दिखाई दिए। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।
आग पर काबू पाने के बाद मलबे में दबे लोगों की तलाश की गई। पुलिस के साथ एयरफोर्स की टीमें भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। आशंका है कि मलबे में अन्य लोग भी दबे हो सकते हैं, जिसके चलते बचाव अभियान लगातार जारी है।
गंभीर घायलों को SRN मेडिकल कॉलेज भेजा
कौशांबी के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि पुलिस टीम मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया है।
पटाखा फैक्ट्री के मालिक का नाम आदिल बताया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। फिलहाल विस्फोट की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

एयरफोर्स स्टेशन से महज दो किलोमीटर दूर है गांव
मोहम्मदपुर गांव प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर स्थित है। घटनास्थल से मनौरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन की दूरी करीब दो किलोमीटर बताई गई है। विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां भी मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य में सहयोग किया। प्रशासन ने घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
विस्फोट के बाद घटनास्थल पर मलबे का ढेर लग गया था। क्षतिग्रस्त मकानों की स्थिति को देखते हुए आसपास के लोगों को भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए। बचाव दलों ने पहले फैक्ट्री और फिर आसपास के क्षतिग्रस्त भवनों के मलबे की जांच शुरू की।
बताया गया कि फैक्ट्री का मालिक आदिल है। पुलिस हादसे के कारणों और फैक्ट्री में पटाखों के निर्माण व भंडारण से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। फैक्ट्री के बगल में नई बस्ती भी बस रही थी, जिसके कारण आसपास के मकानों के क्षतिग्रस्त होने से हादसे का दायरा और बढ़ गया।
फिलहाल पुलिस और राहत-बचाव एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है। हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। धमाके की तेज आवाज और लगातार हुए पटाखों के विस्फोट से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। प्रशासन की टीमें घटनास्थल का निरीक्षण कर रही हैं और क्षतिग्रस्त मकानों तथा हादसे से हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।
एक परिवार पर टूटा मौत का पहाड़
हादसे में एक ही परिवार के कई लोगों की मौत होने की जानकारी ने त्रासदी को और गहरा कर दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल में भी मृतकों और घायलों के परिजनों की भीड़ जुट गई। अपने बच्चों और परिजनों को खोने के बाद परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
मृतकों में पांच साल की प्रियांजलि, 13 वर्षीय प्रवीण सिंह, 12 वर्षीय जाह्नवी, 12 वर्षीय आदित्य, आठ वर्षीय रवि, 40 वर्षीय ज्ञान सिंह, आठ वर्षीय आदित्य, 32 वर्षीय अंजू, 35 वर्षीय विक्रम सरोज, छह वर्षीय अंश और चार वर्षीय नन्हा शामिल हैं। इतनी कम उम्र के बच्चों की मौत से पूरे इलाके में मातम छा गया।
मृतकों में आठ मासूम, अस्पताल में पांच घायलों का इलाज
जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने हादसे में 11 लोगों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पांच घायलों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की टीम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। प्रशासन की ओर से घायलों के उपचार में किसी तरह की कमी न रहने देने की बात कही गई है।

हादसे के बाद अस्पताल में भी सुरक्षा और व्यवस्था बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
फैक्ट्री संचालक समेत छह के खिलाफ एफआईआर
प्रशासन ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए पटाखा फैक्ट्री के संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक फैक्ट्री संचालक आदिल समेत छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। नामजद आरोपियों में संचालक के पिता नौशाद, चाचा शकील, मां, चाची और एक अन्य महिला शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की हैं। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फैक्ट्री में पटाखा निर्माण और बारूद के भंडारण की अनुमति थी या नहीं तथा सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
संपत्ति कुर्क करने की भी चेतावनी
जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा ने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से आरोपी की संपत्ति कुर्क किए जाने की कार्रवाई की बात भी कही गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से विस्फोटक सामग्री रखने और पटाखा निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि आबादी के बीच पटाखा फैक्ट्री किस तरह संचालित हो रही थी और संबंधित विभागों से इसके लिए कोई अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का जाना हाल
घटना की जानकारी मिलने के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वहां भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों और अधिकारियों को घायलों का बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

केशव प्रसाद मौर्य ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि एक ही परिवार के कई लोगों की मौत बेहद दुखद और हृदयविदारक है। सरकार की पहली प्राथमिकता घायलों की जान बचाना है। उनके इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों को भी सरकार की ओर से हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
सीएम योगी ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये और प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने तथा घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हादसे के कारणों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
डीएम-एसएसपी को जांच के निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में जिलाधिकारी और एसएसपी को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री किस मात्रा में रखी गई थी, पटाखा निर्माण के लिए क्या नियमों का पालन किया जा रहा था और आबादी के बीच फैक्ट्री के संचालन की अनुमति किस आधार पर थी।
प्रशासन हादसे के तकनीकी कारणों की भी पड़ताल कर रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि बिजली के खंभे के गिरने और विस्फोट के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
फैक्ट्री के पूरी तरह जमींदोज होने के कारण राहत दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के अंदर संभावित लोगों की तलाश करना है। भारी मशीनों से मलबा हटाते समय बचाव दल विशेष सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस और प्रशासन को आशंका है कि हादसे के समय आसपास मौजूद कुछ लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रशिक्षित उपकरणों के साथ तलाशी अभियान चला रही हैं। बुलडोजरों की मदद से मलबा हटाकर अलग-अलग हिस्सों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मलबे के नीचे कोई अन्य व्यक्ति फंसा था या नहीं।
सवालों के घेरे में पटाखा फैक्ट्री
मोहम्मदपुर में हुए इस हादसे ने आबादी वाले इलाकों में पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 600 वर्गफीट में संचालित बताई जा रही फैक्ट्री के आसपास मकान और नई बस्ती मौजूद थी। ऐसे में बारूद और ज्वलनशील सामग्री के बीच आबादी का होना बेहद जोखिम भरा था।

विस्फोट ने न केवल फैक्ट्री को पूरी तरह नष्ट किया, बल्कि आसपास के मकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। प्रशासन की जांच में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फैक्ट्री को संचालन की अनुमति थी या नहीं और यदि अनुमति थी तो उसमें तय सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
सोमवार दोपहर हुए इस हादसे के बाद मोहम्मदपुर गांव में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की आवाजें गूंज रही थीं, वहां अब चीख-पुकार सुनाई दे रही है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। प्रशासन के सामने फिलहाल राहत-बचाव अभियान पूरा करने, घायलों की जान बचाने और घटना के जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे तक पहुंचाने की चुनौती है।







