स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उरई कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में IAS अधिकारी एवं एसडीएम न्यायिक रिंकू सिंह राही के संबोधन ने नया विवाद खड़ा कर दिया। स्वतंत्रता संग्राम, शहीद भगत सिंह और देश की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर बोलते हुए राही ने कई तीखी टिप्पणियां कीं। उनके संबोधन का वीडियो सामने आने के बाद उनके बयान को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
कार्यक्रम में रिंकू सिंह राही ने अंग्रेजी शासन के दौरान किसानों के कथित शोषण का जिक्र करते हुए कहा कि हर स्तर पर शोषण के लिए केवल अंग्रेज जिम्मेदार नहीं थे, बल्कि व्यवस्था में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भी उसकी प्रक्रिया का हिस्सा थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अंग्रेज कलेक्टर प्रत्येक मामले में पटवारी को किसानों के शोषण का निर्देश देता था। उनके मुताबिक कई भारतीय कर्मचारी अपने अंग्रेज अधिकारियों के सामने बेहतर कर्मचारी साबित होने के लिए लक्ष्य पूरा करने में लगे रहते थे।
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में आम लोगों की भागीदारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सभी लोगों ने आजादी की लड़ाई में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं लिया था। उनके अनुसार कुछ लोगों के भीतर यह भावना पैदा हुई कि परिवार से आगे बढ़कर देश और मानवता के प्रति भी उनकी जिम्मेदारी है। ऐसे लोग अपने परिवार और निजी जीवन की परवाह किए बिना स्वतंत्रता संग्राम में आगे आए और बलिदान दिया।
भगत सिंह को लेकर टिप्पणी से बढ़ा विवाद
संबोधन के दौरान राही ने शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद का उदाहरण देते हुए कहा कि क्या उनके परिवार नहीं थे। इसी क्रम में उन्होंने भगत सिंह को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि “आज के टाइम पर अगर तुलना करता हूं, तो लगता है भगत सिंह सबसे बेबकूफ, बिल्कुल बेकार बच्चे थे, वो घर के हिसाब से बागी थे।”
हालांकि, अपने वक्तव्य के अगले हिस्से में उन्होंने इसी ‘बागी’ भावना को देश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यही लोग थे, जिन्होंने स्वयं को देश के साथ खड़ा किया और परिवार की चिंता से ऊपर उठकर देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भगत सिंह ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते समय क्या कभी यह सोचा होगा कि भविष्य में उनकी जीवनी लिखी जाएगी या उनका नाम इतिहास में दर्ज होगा।
30 साल पुराने मुकदमे का जिक्र कर जताई नाराजगी
राही ने अपने न्यायिक अनुभव का जिक्र करते हुए एक करीब 30 वर्ष पुराने मामले की बात भी रखी। उन्होंने कहा कि एक पुराने मुकदमे में केवल पैमाइश का मामला वर्षों से लंबित है और इसे आसानी से सुलझाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति देखकर उन्हें शर्म महसूस होती है और लगता है कि वे आजादी के दीवानों के साथ धोखा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि देश में ऐसी स्थिति भी आएगी, जहां दशकों पुराने मामले लंबित पड़े रहेंगे। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्या का कारण कहीं न कहीं हम स्वयं हैं और हम यह समझ नहीं पा रहे कि आजादी का वास्तविक अर्थ क्या था और इसे हासिल करने की जरूरत क्यों पड़ी थी।
‘आजादी के दीवानों को धोखा दे रहे हम जैसे निकम्मे लोग’
अपने संबोधन में राही ने मौजूदा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज हम कहीं न कहीं उन्हीं लोगों की तरह हो गए हैं, जो गुलामी के दौर में भी अपनी सामान्य दिनचर्या में जीवन जी रहे थे और देश की गुलामी को लेकर कोई विशेष चिंता नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए जिन लोगों ने अपना परिवार, निजी जीवन और सुख-सुविधाएं छोड़कर संघर्ष किया, उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवस्था कायम करना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने अंग्रेजी शासन की प्रशासनिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि अंग्रेजी फौज का काम जीतना था, लेकिन तत्कालीन सिविल सर्विसेज में काम करने वाले कुछ अधिकारी ऐसे भी थे, जो व्यवस्था में सुधार और नई चीजें लाने का प्रयास करते थे।
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर दिए गए इस संबोधन में रिंकू सिंह राही की भगत सिंह को लेकर की गई टिप्पणी अब सबसे अधिक चर्चा में है। एक ओर उनके शब्दों को शहीद के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है, वहीं उनके पूरे संबोधन को देखने पर यह भी सामने आता है कि उन्होंने भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों के त्याग को मौजूदा व्यवस्था के लिए प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। फिलहाल उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और इसको लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।







