जालौन के एट क्षेत्र के पचोखरा धाम में आयोजित स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती के 71वें प्राकट्योत्सव कार्यक्रम में अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास जी महाराज पहुंचे। उन्होंने स्वामी राजेश्वरानंद रामायणी महाराज को प्राकट्योत्सव की शुभकामनाएं देते हुए संतों को समाज के विभिन्न विषयों पर संवाद के लिए आगे आने की बात कही। इस दौरान उन्होंने सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति, राम मंदिर, काशी-मथुरा मंदिर विवाद, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, विपक्षी दलों, आरक्षण और संत समाज की भूमिका को लेकर कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
महंत राजूदास ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों में भगवान राम का नाम लेने पर मुकदमे दर्ज किए जाते थे और लोगों को जेल भेजने की कार्रवाई होती थी। हनुमानगढ़ी से जुड़े पुराने घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने लाठीचार्ज, हनुमान चालीसा और 84 कोसी परिक्रमा से संबंधित अपने दावे भी रखे। उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसके बाद वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था अस्तित्व में आई है।

काशी-मथुरा में मंदिर निर्माण की पैरवी
महंत राजूदास ने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह काशी और मथुरा से जुड़े मंदिर निर्माण के मुद्दे पर भी लोगों को आगे आकर संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मामला भी अदालत में चला था और न्यायिक प्रक्रिया के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। उन्होंने काशी-मथुरा से जुड़े मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही।
उन्होंने न्यायपालिका से जुड़े पुराने घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। हालांकि इन दावों को उन्होंने अपने संबोधन के दौरान राजनीतिक संदर्भ में रखा। महंत राजूदास ने कहा कि समाज की भावनाओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय विभिन्न मामलों में संज्ञान लेता है, इसलिए काशी-मथुरा से जुड़े मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।

अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
महंत राजूदास ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने गायत्री प्रसाद प्रजापति का उदाहरण देते हुए सवाल उठाए और कहा कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगने मात्र से उसे दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन जांच और कानूनी प्रक्रिया सभी मामलों में समान होनी चाहिए। उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा पर लगाए गए आरोपों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके अनुसार संबंधित लोगों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा देकर जांच में सहयोग किया।
अतीक, आजम और मुख्तार के पोस्टर पर प्रतिक्रिया
अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी से जुड़े पोस्टर के सवाल पर महंत राजूदास ने कहा कि अपराधी की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इन नेताओं के संदर्भ में अपने राजनीतिक और धार्मिक विचार भी रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने हिंदू समाज और सनातन संस्कृति के खिलाफ काम किया, जबकि मौजूदा सरकार में उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर बोले
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी और गबन के मामले पर महंत राजूदास ने कहा कि वह इसे राम मंदिर में चोरी के रूप में स्वीकार नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे की राशि की गिनती और बैंक संबंधी कार्य मुख्य मंदिर से अलग कार्यालय में होता था और इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आई। उन्होंने कहा कि मामले में कार्रवाई हुई, लेकिन जिस तरह पूरे प्रकरण को प्रचारित किया गया, उससे संतों और ब्राह्मण समाज को बदनाम करने की कोशिश हुई।
वास्तविकता यह है कि जून 2026 में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में एफआईआर दर्ज हुई और आठ लोगों को नामजद किया गया था। जांच में गिरफ्तारी और बरामदगी की कार्रवाई भी हुई है तथा पुलिस जांच आगे बढ़ी है। महंत राजूदास ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की बात कहते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं में संत समाज की भूमिका बढ़ाने की पैरवी की।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर में आने वाला दान श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए उसकी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने मंदिर प्रबंधन को लेकर नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े न हों।
आरक्षण पर आर्थिक आधार की पैरवी
आरक्षण के मुद्दे पर महंत राजूदास ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि आरक्षण की व्यवस्था में आर्थिक स्थिति को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब व्यक्ति किसी भी जाति का हो सकता है, इसलिए जरूरतमंद व्यक्ति को अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने संत समाज से राजनीतिक दलों के दबाव से अलग रहकर सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतों को सनातन संस्कृति के साथ शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार जैसे विषयों पर भी समाज के बीच संवाद करना चाहिए। कार्यक्रम में संत-महात्माओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। पचोखरा धाम में स्वामी राजेश्वरानंद रामायणी के 71वें प्राकट्योत्सव को लेकर सात दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान उनके साथ राजेश रामायणी के पुत्र शिष्य गुरु प्रसाद जी महाराज मौजूद रहे।





