Thursday, September 17, 2026

पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की मौत से बंगाल की राजनीति में हलचल

पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी रविवार को बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में मृत पाए गए। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। मामले को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि घटना की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि क्या आशीष बनर्जी को किसी तरह की धमकी या दबाव का सामना करना पड़ रहा था।

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि उन्होंने आशीष बनर्जी के परिवार से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि आशीष बनर्जी एक अच्छे राजनेता थे और स्थानीय भाजपा नेताओं तथा पुलिस के साथ भी उनके अच्छे संबंध थे। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच करेगी और वह स्वयं भी परिवार से मुलाकात करेंगे।

मुख्यमंत्री ने मामले में कॉल रिकॉर्ड और कथित सुसाइड नोट की जांच की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, कथित सुसाइड नोट लेटरहेड पैड पर लिखा गया है। पुलिस इसकी जांच करेगी कि उसमें क्या लिखा गया है और उसके पीछे की परिस्थितियां क्या थीं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि टीएमसी के भ्रष्ट तत्वों द्वारा उन्हें डराने या दबाव में लेने की कोशिश की गई हो सकती है।

कथित सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार से किया इनकार

आशीष बनर्जी का एक कथित सुसाइड नोट सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुद पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। नोट में उन्होंने लिखा कि उनका भ्रष्टाचार से कोई लेना-देना नहीं था और उन्हें बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए।

कथित नोट के अनुसार, आशीष बनर्जी ने कहा कि वह छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे और बर्दवान विश्वविद्यालय में छात्र संसद के महासचिव भी रहे। उन्होंने दावा किया कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने किसी से काम के बदले पैसे नहीं लिए और न ही अपने साथ काम करने वाले लोगों से कोई आर्थिक लाभ लिया।

उन्होंने यह भी लिखा कि टीआरडीए की आम बैठक के अलावा उनके पास कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं थी। वह निविदा समिति के सदस्य नहीं थे और किसी चेक पर हस्ताक्षर करने, किसी योजना को मंजूरी देने अथवा अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार भी उनके पास नहीं था।

कथित नोट में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार बदनाम किया गया और झूठे आरोप लगाकर दबाव में रखा गया। उन्होंने लिखा कि इन परिस्थितियों के कारण उन्हें लगा कि शायद राजनीति में आना ही उनकी गलती थी। हालांकि, पुलिस अभी कथित सुसाइड नोट की प्रमाणिकता और उसमें लिखी बातों की जांच करेगी।

ममता बनर्जी ने राजनीतिक दबाव का लगाया आरोप

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि आशीष बनर्जी ने अपना अधिकांश जीवन शिक्षा, समाजसेवा और रामपुरहाट व बीरभूम के लोगों की सेवा में समर्पित किया।

ममता बनर्जी के मुताबिक, पांच बार विधायक रहे आशीष बनर्जी विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और चेयरमैन भी रहे तथा उन्होंने रामपुरहाट के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उन्हें बार-बार बदनाम किया गया, झूठे आरोप लगाए गए और लगातार मानसिक एवं भावनात्मक दबाव में रखा गया।

ममता बनर्जी ने कहा कि उनके जीवन के अंतिम दिनों में जिस तरह का मानसिक और भावनात्मक दबाव उन्होंने झेला, उसने इस घटना को और पीड़ादायक बना दिया है।

फिलहाल आशीष बनर्जी की मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है। पुलिस कथित सुसाइड नोट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही मौत के कारणों और इसके पीछे की परिस्थितियों पर स्थिति स्पष्ट करेगी।

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