प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। मई 2014 में पहली बार केंद्र की सत्ता संभालने के बाद से मोदी सरकार ने तीन कार्यकाल पूरे किए हैं। इस दौरान केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए। ये बदलाव केवल आम चुनावों के बाद नई सरकार के गठन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कार्यकाल के बीच भी समय-समय पर कैबिनेट विस्तार और फेरबदल किए गए। इन बदलावों का उद्देश्य राजनीतिक संतुलन साधना, संगठन को मजबूत करना, राज्यों को प्रतिनिधित्व देना और सरकार के प्रदर्शन को बेहतर बनाना रहा।
पहले कार्यकाल में तीन बड़े विस्तार
26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल (2014-2019) में तीन प्रमुख कैबिनेट विस्तार किए।
पहला विस्तार 9 नवंबर 2014 को हुआ, जब सरकार बनने के लगभग छह माह बाद 21 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्री, सुरेश प्रभु को रेल मंत्री, जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री तथा चौधरी बीरेंद्र सिंह को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस विस्तार में किसी मंत्री को हटाया नहीं गया, लेकिन कई मंत्रालयों का पुनर्वितरण किया गया।
दूसरा विस्तार 5 जुलाई 2016 को हुआ। इसमें 19 नए राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया और प्रकाश जावड़ेकर को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वहीं पांच मंत्रियों ने इस्तीफा देकर मंत्रिमंडल से विदाई ली। इसी फेरबदल में स्मृति ईरानी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय लेकर उन्हें वस्त्र मंत्रालय दिया गया, जबकि प्रकाश जावड़ेकर को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण फेरबदल 3 सितंबर 2017 को हुआ। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले किए गए इस विस्तार में नौ नए मंत्रियों को शामिल किया गया तथा निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान और मुख्तार अब्बास नकवी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। वहीं छह मंत्रियों ने इस्तीफा देकर मंत्रिमंडल छोड़ा।
दूसरे कार्यकाल में सबसे बड़ा फेरबदल
30 मई 2019 को दूसरी बार सरकार बनने के बाद 7 जुलाई 2021 को मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कैबिनेट विस्तार किया। इसमें कुल 43 मंत्रियों ने शपथ ली, जिनमें 36 नए चेहरे शामिल थे और सात राज्य मंत्रियों को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
इस विस्तार में कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्रालय, अश्विनी वैष्णव को रेल, संचार एवं आईटी मंत्रालय, नारायण राणे को एमएसएमई, सर्बानंद सोनोवाल को बंदरगाह एवं आयुष मंत्रालय तथा भूपेंद्र यादव को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। अनुराग ठाकुर, मनसुख मंडाविया, हरदीप सिंह पुरी, किरेन रिजिजू, जी. किशन रेड्डी, आर.के. सिंह और परषोत्तम रूपाला को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
इसी फेरबदल में रविशंकर प्रसाद, डॉ. हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, डी.वी. सदानंद गौड़ा, बाबुल सुप्रियो, संतोष गंगवार सहित 12 मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया। यह विस्तार मोदी सरकार के सबसे व्यापक और चर्चित फेरबदलों में शामिल रहा।
दूसरे कार्यकाल में हुए अन्य बदलाव
वर्ष 2022 में मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार अन्य मंत्रियों को दिया गया। मई 2023 में किरेन रिजिजू से कानून मंत्रालय लेकर अर्जुन राम मेघवाल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनावों के बाद इस्तीफा देने वाले मंत्रियों के विभागों का पुनर्वितरण किया गया, जबकि मार्च 2024 में पशुपति कुमार पारस के इस्तीफे के बाद भी मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
तीसरे कार्यकाल में अब तक नहीं हुआ विस्तार
9 जून 2024 को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार के वर्तमान कार्यकाल में अब तक कोई बड़ा कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है। हालांकि राजनीतिक हलकों में पहले विस्तार को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। यदि ऐसा होता है तो यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला मंत्रिमंडलीय विस्तार होगा।
विपक्ष से आए नेताओं को भी मिला स्थान
मोदी सरकार के विभिन्न कैबिनेट विस्तारों में विपक्षी दलों से भाजपा में शामिल हुए कुछ प्रमुख नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। इनमें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया। हरियाणा के वरिष्ठ नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। वहीं शिवसेना छोड़कर भाजपा में आए सुरेश प्रभु को रेल मंत्री बनाया गया।
राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन की रणनीति
पिछले 12 वर्षों में हुए कैबिनेट विस्तारों से स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समय-समय पर सरकार के प्रदर्शन, राजनीतिक परिस्थितियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक आवश्यकताओं के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव किए। कई नए नेताओं को अवसर दिया गया, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता भी दिखाया गया। यही कारण है कि मोदी सरकार का मंत्रिमंडल लगातार बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालता रहा है।






