जालौन जनपद के पुर गांव में लगभग दो दशक से सरकारी चकरोड पर किए गए अवैध कब्जे को हटा दिया गया है। प्रशासन की सख्ती और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद कब्जाधारी ने स्वयं ही चकरोड से अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया। वर्षों से बंद पड़े इस रास्ते के खुलने से ग्रामीणों को राहत मिली है।
उरई तहसील के ग्राम पुर में स्थित चकरोड संख्या-463 पर पिछले लगभग 20 वर्षों से गांव निवासी अनिल सिंह ने अवैध कब्जा कर रखा था। आरोप है कि उन्होंने चकरोड पर फाटक और खंभे लगाकर सरकारी भूमि को अपने खेत में मिला लिया था। इस कारण ग्रामीणों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता था, जिससे उन्हें वर्षों से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में पहले भी प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी। करीब दो वर्ष पूर्व कब्जाधारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था और एक वर्ष पहले अतिक्रमण हटाने का आदेश भी जारी हुआ था। इसके बावजूद सरकारी चकरोड को कब्जामुक्त नहीं कराया जा सका था। ग्रामीणों के अनुसार, अनिल सिंह गांव में एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते हैं, जिसके कारण कोई भी उनके खिलाफ खुलकर बोलने का साहस नहीं कर पा रहा था।

स्थिति तब बदली जब गांव के लोगों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और लेखपाल, पुलिस तथा तहसील प्रशासन की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण के दौरान कब्जाधारी मौके पर उपस्थित नहीं हुए, जिससे तत्काल भूमि की पैमाइश नहीं हो सकी।
हालांकि, अगले ही दिन कब्जाधारी ने स्वयं ही चकरोड से फाटक, खंभे और अन्य अवरोध हटाकर अतिक्रमण समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रशासन ने ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को निर्देश दिए हैं कि चकरोड पर मिट्टी डालकर रास्ते को जल्द से जल्द आवागमन योग्य बनाया जाए, ताकि ग्रामीणों को सुविधा मिल सके।






