कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की लड़कियों का आजाद होना जरूरी है। पिता, पति और बेटे के साथ महिला का रिश्ता जरूर हो सकता है, लेकिन उसकी पहचान इन रिश्तों से नहीं होनी चाहिए। कार्यक्रम में केवल छात्राएं शामिल हुईं और इस दौरान राहुल गांधी के समर्थन में ‘राहुल-राहुल’ के नारे भी लगाए गए। कार्यक्रम के लिए पुलिस ने 30 शर्तों के साथ अनुमति दी थी।
राहुल गांधी का छात्रों के साथ LIVE संवाद
लड़की को पिता, पति और बच्चों की संपत्ति बताया गया है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए और उन्हें किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
राहुल ने लड़कियों की शिक्षा और रोजगार को लेकर समाज की सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यह मानसिकता कहां से आती है कि लड़की को नहीं पढ़ाना और लड़के को पढ़ाना है। लड़की को नौकरी नहीं करने देना और उसके आधुनिक होने पर सवाल उठाना इसी सोच का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि देश में करीब 60 प्रतिशत लड़कियां अकेले घर से बाहर नहीं जा सकतीं। शादी या घरेलू कामकाज के कारण 45 प्रतिशत लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में केवल आठ प्रतिशत महिलाओं के पास स्वतंत्र रूप से उनके नाम की संपत्ति है।
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने के लिए हिंसा, अपमान-अनादर, समय और नियंत्रण जैसे चार तरीके अपनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार अक्सर महिलाओं से कहता है कि बाहर मत जाओ, कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। उन्होंने इसे महिलाओं पर नियंत्रण का एक तरीका बताया और हिंसा के विभिन्न रूपों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला से पूछा कि कोई पुरुष महिला को नियंत्रित क्यों करना चाहता है और क्या वह पितृसत्तात्मक सोच के कारण खुद को नियंत्रित महसूस करती हैं। महिला ने जवाब दिया कि वह खुद को एक इंसान मानती हैं और उसे गुस्सा आता है जब लोग सिर्फ महिला होने के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर लड़कियों से कहा जाता है कि वे सुंदर हैं, कोई भी उनसे शादी कर लेगा और उनका जीवन अच्छा हो जाएगा।
इससे पहले राहुल गांधी ने 17 जून कोटा, 17 जुलाई देहरादून और आठ अगस्त को प्रयागराज में छात्रों से संवाद किया था। इन कार्यक्रमों में उन्होंने पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे उठाए थे।






