उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अचानक 10 दिन के अवकाश पर गुजरात रवाना होने के बाद प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राज्यपाल 17 अगस्त से 26 अगस्त तक अवकाश पर हैं। बताया गया है कि उन्होंने छुट्टी के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुमति ली है। यूपी का राज्यपाल पद संभालने के बाद यह पहली बार है, जब आनंदीबेन पटेल इतनी लंबी अवधि के अवकाश पर गई हैं। उनके अचानक छुट्टी पर जाने को लेकर जहां सामान्य प्रशासनिक कारणों की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को जल्द नया राज्यपाल मिलने की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है।
हालांकि, राजभवन की ओर से ऐसी किसी भी संभावना की पुष्टि नहीं की गई है। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) सुधीर बोवड़े ने आनंदीबेन पटेल को पद से मुक्त किए जाने अथवा उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति से जुड़ी अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि राज्यपाल सिलवासा और दमन एवं दीव के भ्रमण पर हैं। इस दौरान उनकी वहां के राज्यपाल से मुलाकात भी प्रस्तावित है। ऐसे में राजभवन की ओर से फिलहाल उनके अवकाश को नियमित दौरे और निजी कार्यक्रमों से जोड़कर ही देखा जा रहा है।
लंबे कार्यकाल के बीच अचानक छुट्टी ने बढ़ाई चर्चा
आनंदीबेन पटेल 29 जुलाई 2019 से उत्तर प्रदेश की राज्यपाल हैं। वह प्रदेश में सात वर्ष से अधिक समय पूरा कर चुकी हैं। इतने लंबे कार्यकाल के बाद अचानक लंबी छुट्टी पर जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि राज्यपाल का अवकाश राष्ट्रपति की अनुमति से लिया गया है और राजभवन ने उनके पद से हटाए जाने या कार्यकाल समाप्त होने जैसी किसी बात की पुष्टि नहीं की है।
राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालयों, शिक्षा व्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा में रही है। उन्होंने कई मौकों पर अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन को व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं। हाल के दिनों में उनके कुछ बयानों और टिप्पणियों को भी राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से देखा गया।
विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी
हाल के कार्यक्रमों में आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। गोरखपुर में उन्होंने छात्रावास की व्यवस्थाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और संस्थानों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने पर जोर दिया था।
कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भी राज्यपाल ने व्यवस्थाओं में लापरवाही पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को व्यवस्थाओं की दोबारा समीक्षा करने और कमियों को दूर करने की जरूरत बताई थी। उनके इस रुख को विश्वविद्यालयों में जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में भी दिया था संदेश
14 अगस्त को झांसी स्थित बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भी राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को समय के साथ लगातार अपग्रेड करने पर जोर दिया था। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीक, शिक्षा और शोध के स्तर को मजबूत करने की बात कही। छात्राओं से जुड़े कार्यक्रमों और महिला सशक्तीकरण को लेकर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।
राज्यपाल के लगातार सक्रिय तेवर और विभिन्न संस्थानों की व्यवस्थाओं पर दिए जा रहे निर्देशों के बीच उनके अचानक अवकाश पर जाने से चर्चाओं को और हवा मिली है। हालांकि, राजभवन के अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद फिलहाल इन चर्चाओं को अटकलों से अधिक कुछ नहीं माना जा रहा है।
छह राज्यों में राज्यपाल बदलने की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में इस समय देश के करीब छह राज्यों में राज्यपालों के संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा चल रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश का नाम भी लिया जा रहा है। आनंदीबेन पटेल सात वर्ष से अधिक समय से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पद पर हैं। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी जुलाई 2019 में पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल भी सात वर्ष से अधिक हो चुका है।
इसके अलावा केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के पास तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी है। मार्च 2026 में उन्हें तमिलनाडु की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ऐसे में राज्यपालों के संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं।
अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार
हालांकि, उत्तर प्रदेश के संबंध में फिलहाल न तो राष्ट्रपति भवन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा हुई है और न ही राजभवन ने आनंदीबेन पटेल को हटाए जाने या उनके स्थान पर किसी नए राज्यपाल की नियुक्ति की जानकारी दी है। राजभवन के एसीएस द्वारा भी पदभार मुक्त किए जाने संबंधी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज किया गया है।
ऐसे में आनंदीबेन पटेल की 10 दिन की छुट्टी को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि वह राष्ट्रपति की अनुमति से अवकाश पर हैं और 26 अगस्त तक उनकी वापसी निर्धारित है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उनका कार्यकाल पूर्ववत जारी रहता है या केंद्र सरकार की ओर से राज्यपालों को लेकर कोई बड़ा निर्णय सामने आता है। फिलहाल राज्यपाल की छुट्टी ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में संभावित बदलाव की चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।






