संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को संसद परिसर में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत को लेकर सियासी घमासान देखने को मिला। एनडीए सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर धर्मेंद्र प्रधान का माला पहनाकर स्वागत किया और उनके समर्थन में नारे लगाए। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं का अपमान बताया।
LOP राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का पद छोड़ना किसी नैतिक जिम्मेदारी का परिणाम नहीं था, बल्कि देशभर में छात्रों और युवाओं के लगातार बढ़ते आक्रोश का नतीजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था और छात्रों के आंदोलनों के कारण सरकार दबाव में आई और अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
राहुल गांधी ने कहा कि जिस व्यक्ति के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजरी, उसका संसद परिसर में सम्मान किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार यह कोई सम्मान समारोह नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े संकट का जश्न मनाने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक प्रदर्शन कर रही है।
विपक्ष के नेता ने हाल की दुखद घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था की विफलताओं के कारण हाल में 26 मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि लाखों योग्य छात्र अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। उन्होंने इन समस्याओं के लिए पूर्व शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार ठहराया।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने भी भाजपा पर सवालों की बौछार की। उन्होंने पूछा कि आखिर धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान किस उपलब्धि के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पेपर लीक, चरमराती शिक्षा व्यवस्था, छात्रों पर लाठीचार्ज और अन्य विवादों के बावजूद उनका अभिनंदन किया जा रहा है, तो भाजपा देश के युवाओं को क्या संदेश देना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि इन घटनाओं को उपलब्धि नहीं माना जा सकता, तो फिर सम्मान का औचित्य क्या है।
कांग्रेस ने कहा कि देश का युवा इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा है और सरकार से शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की सुरक्षा तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब चाहता है।




