केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कर्मचारियों की कमी लगातार बढ़ रही है। बीते एक दशक में केंद्र सरकार के खाली पदों की संख्या करीब दोगुनी हो गई है। वर्ष 2015 में जहां 4,20,547 पद रिक्त थे, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 8,23,556 हो गई। इस दौरान कुल मंजूर पदों में रिक्तियों की हिस्सेदारी भी 11.5 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गई।
केंद्र के सिविल कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से संबंधित व्यय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 80 मंत्रालयों और विभागों में कुल 39,23,212 पद मंजूर हैं। इनमें 30,99,656 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 8,23,556 पद खाली हैं। वर्ष 2015 में 36,49,468 पद मंजूर थे, जिनमें 32,28,921 पद भरे हुए थे और 4,20,547 रिक्त थे। यानी एक दशक में मंजूर पदों की संख्या 2.74 लाख बढ़ी, लेकिन भरे हुए पदों की संख्या करीब 1.29 लाख घट गई।

गृह मंत्रालय में भी बढ़ी रिक्तियां
गृह मंत्रालय में मंजूर पदों की संख्या करीब 1.02 लाख बढ़ी, जबकि कर्मचारियों की संख्या में करीब 49,621 का ही इजाफा हुआ। इसका असर रिक्तियों पर पड़ा। यहां खाली पद 58,774 से बढ़कर 1,10,885 हो गए।
रेलवे में 2015 में कोई पद रिक्त नहीं बताया गया था, जबकि 2024 में 2,40,125 पद यानी 16.2 फीसदी पद खाली थे। रक्षा के सिविलियन पदों में सबसे ज्यादा 2,41,643 रिक्तियां हैं। यहां रिक्ति दर 31.9 फीसदी से बढ़कर 43.4 फीसदी हो गई। डाक विभाग में भी खाली पद 7,561 से बढ़कर 61,546 हो गए।
कॉमर्स विभाग में 55 फीसदी से ज्यादा पद खाली
विभागवार स्थिति में कॉमर्स विभाग की रिक्ति दर सबसे अधिक रही। 2024 में यहां 55.4 फीसदी पद खाली थे, जबकि 2015 में यह दर 37.1 फीसदी थी। सिविल एविएशन में 45.2 फीसदी और लेबर विभाग में 41.5 फीसदी पद रिक्त हैं। हेल्थ विभाग में भी रिक्ति दर शून्य से बढ़कर 5.8 फीसदी हो गई।
सरकारी कंपनियों में ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी बढ़ी
सरकारी कंपनियों में भी नियमित कर्मचारियों की तुलना में ठेका कर्मियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2015 में 298 पीएसयू में 15,87,149 कर्मचारी थे, जिनमें 2,95,975 यानी करीब 18.6 फीसदी कर्मचारी ठेके पर थे। वर्ष 2025 में 475 पीएसयू में कुल 15,42,339 कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें सिर्फ 7,83,728 नियमित कर्मचारी थे, जबकि 7,58,611 यानी 49.1 फीसदी कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे थे।
खाली पदों की भरपाई के लिए सरकारी विभाग जीईएम यानी गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के जरिए आउटसोर्सिंग भी कर रहे हैं। पिछले साल इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से रिकॉर्ड करीब 10 लाख कर्मचारियों को आउटसोर्स किया गया। जानकारों के मुताबिक कई मंत्रालय और विभाग सीधे कर्मचारियों की नियुक्ति के बजाय कंपनियों को काम आउटसोर्स करने पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं।
कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि केंद्र सरकार के विभागों में मंजूर पदों की संख्या बढ़ने के बावजूद नियमित नियुक्तियों की रफ्तार उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। इसका नतीजा यह है कि सरकारी तंत्र में रिक्त पदों का दबाव बढ़ता जा रहा है और ठेका कर्मचारियों पर निर्भरता भी लगातार बढ़ रही है।






