औरैया जिले के बहुचर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी शिक्षिका बहन सुधा चौबे हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने फैसला सुना दिया। बुधवार दोपहर करीब दो बजे MP-MLA कोर्ट ने सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक, उनके दो भाइयों समेत 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसले के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी।
यह मामला 15 जनवरी 2020 का है। उस दिन मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि जमीन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और इसी दौरान दोनों भाई-बहन की जान चली गई।

एक बीघा जमीन बनी दोस्ती टूटने की वजह
मंजुल चौबे और कमलेश पाठक कभी बेहद करीबी दोस्त हुआ करते थे। मंजुल के छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के दौरान कमलेश पाठक ने उनका साथ दिया था। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि स्थानीय लोग मंजुल को कमलेश की परछाई तक कहते थे।
बाद में राजनीतिक और स्थानीय वर्चस्व को लेकर दोनों के रिश्ते बिगड़ते चले गए। 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान मतभेद और गहरे हुए। इसके बाद मंजुल भाजपा नेताओं के करीब आए, जबकि कमलेश पाठक सपा की राजनीति में सक्रिय रहे। धीरे-धीरे दोस्ती दुश्मनी में बदल गई।
विवाद पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर भी बढ़ा। आरोप था कि कमलेश पाठक इस जमीन पर अपना प्रभाव कायम करना चाहते थे, जबकि मंजुल चौबे इसका विरोध कर रहे थे। इसी जमीन को लेकर दोनों पक्षों में तनाव लगातार बढ़ता गया।
विवाद के बाद हुई थी फायरिंग
15 जनवरी 2020 को इसी विवादित जमीन पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। कहासुनी और मारपीट के बाद मामला फायरिंग तक पहुंच गया। गोली लगने से मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मारपीट किए जाने के आरोप भी लगे थे।
पुलिस ने जांच के बाद मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें से एक आरोपी नाबालिग था, इसलिए उसका मामला किशोर न्यायालय भेज दिया गया। वहीं गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर के मामले में राहत मिली थी, लेकिन हत्या का मुकदमा उसके खिलाफ चलता रहा।
900 से ज्यादा तारीखें, 72 गवाह
हत्याकांड की सुनवाई के दौरान करीब छह वर्षों में अदालत में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं। मामले में दोनों पक्षों की ओर से कुल 72 गवाह पेश किए गए। मंजुल चौबे के परिवार की ओर से 33 और कमलेश पाठक की ओर से 39 गवाहों ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। लंबी सुनवाई के बाद बुधवार को अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
करोड़ों की संपत्ति हो चुकी है जब्त
डबल मर्डर के बाद प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़ रुपये, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ रुपये और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई थीं।
मुलायम सिंह यादव से भी रहा राजनीतिक टकराव
कमलेश पाठक का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है। वह कम उम्र में विधायक बने और बाद में समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीबी नेताओं में शामिल हुए। वर्ष 1990 में वह विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला। वर्ष 2002 में डेरापुर से विधायक बने। इसके बाद दिबियापुर और सिकंदरा विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2013 में उन्हें सपा सरकार ने रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। 2015 में वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधान परिषद सदस्य चुने गए।
औरैया जिले को लेकर कमलेश पाठक का तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से टकराव भी सुर्खियों में रहा। जिले को समाप्त किए जाने के विरोध में उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। आरोप रहा कि औरैया में मुलायम सिंह की सभा के दौरान उनके हेलीकॉप्टर को उतरने से रोकने के लिए फायरिंग की गई थी। इस घटना के बाद कमलेश पाठक प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चित हो गए थे।






