उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं, जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय से खाली चल रहे प्रदेश प्रभारी के पद पर तावड़े की नियुक्ति को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

विनोद तावड़े को संगठन और चुनावी प्रबंधन का लंबा अनुभव है। वह हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के प्रभारी रह चुके हैं। बिहार में उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा-जदयू गठबंधन ने बेहतर प्रदर्शन किया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बिहार में एनडीए की रणनीति पर काम किया था। इसके अलावा 2026 में उन्हें केरल विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी, जहां भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज कर अपना खाता खोला।
तावड़े की नई जिम्मेदारी ऐसे समय में आई है, जब भाजपा उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन को नए सिरे से सक्रिय कर रही है। पार्टी नेतृत्व सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहा है। जातीय समीकरण, बूथ स्तर की स्थिति और कार्यकर्ताओं के मनोबल को लेकर भी रिपोर्ट जुटाई जा रही है।
यूपी की चुनावी मशीनरी का अनुभव
विनोद तावड़े के लिए उत्तर प्रदेश नया मैदान नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें यूपी समेत पांच राज्यों के चुनाव के लिए कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई थी। उस चुनाव में भाजपा ने पंजाब को छोड़कर बाकी चार राज्यों में सरकार बनाने में सफलता हासिल की थी। इसके बाद राष्ट्रीय संगठन में तावड़े की भूमिका और मजबूत हुई।
तावड़े की पहचान केवल महाराष्ट्र के नेता के रूप में नहीं, बल्कि संगठन के मजबूत रणनीतिकार के तौर पर भी है। उनकी राजनीतिक पारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुई। वर्ष 2014 में वह महाराष्ट्र की बोरीवली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद वह राष्ट्रीय संगठन में पहुंचे।
26 सितंबर 2020 को भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया। बाद में उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू के चुनाव अभियान में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उन्हें चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
चुनावी प्रबंधन में मजबूत पकड़
भाजपा में तावड़े को चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक रणनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है। 2024 में उन्हें कठिन लोकसभा सीटों पर पार्टी की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। यही अनुभव अब उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अप्रैल 2026 में भी तावड़े की लखनऊ में सक्रियता चर्चा में रही थी। संगठन और मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव की चर्चाओं के बीच उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की थीं। उस समय से ही उनके यूपी संगठन में बड़ी भूमिका मिलने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
तीन चुनावी राज्यों में नई जिम्मेदारियां
भाजपा ने उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और गुजरात में भी चुनावी तैयारियों को देखते हुए प्रभारियों की नियुक्ति की है। सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुग को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है। तीनों राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने एक दिन पहले अपनी नई टीम का ऐलान किया था। 65 पदाधिकारियों वाली इस टीम में उत्तर प्रदेश से भी आठ नेताओं को जगह मिली है। अब प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति के साथ भाजपा ने यूपी में संगठन और चुनावी रणनीति को गति देने का संकेत दिया है।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि विनोद तावड़े प्रदेश संगठन, सरकार और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच किस तरह समन्वय स्थापित करते हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।






