Sunday, July 12, 2026
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स्कूल वाहनों की सुरक्षा पर सख्त प्रशासन, अनफिट वाहन मिलने पर पहली बार ₹1 लाख और दोबारा पकड़े जाने पर ₹5 लाख जुर्माने की होगी संस्तुति

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जालौन जनपद में स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला विद्यालय परिवहन यान सुरक्षा समिति की बैठक में विद्यालयी वाहनों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “फिट वाहन और फिट चालक ही बच्चों को लेकर सड़क पर उतरेंगे। विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।”

बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिन विद्यालयों में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन हो चुका है, वे शासनादेश के अनुसार प्रत्येक तीन माह में नियमित बैठक आयोजित करें। वहीं जिन विद्यालयों ने अभी तक समिति का गठन नहीं किया है, उन्हें 15 दिनों के भीतर समिति गठित कर इसकी सूचना जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही 15 दिन बाद पुनः समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग द्वारा नोटिस जारी किए गए नौ अनफिट विद्यालयी वाहनों की तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए। बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि कोई अनफिट विद्यालयी वाहन पहली बार संचालित मिलता है तो उसके विरुद्ध एक लाख रुपये और दूसरी बार पकड़े जाने पर पांच लाख रुपये जुर्माना लगाए जाने की शासन स्तर पर संस्तुति की जाएगी।

उन्होंने परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि जो वाहन निर्धारित आयु सीमा या मॉडल कंडीशन से बाहर हो चुके हैं, उनका स्थलीय सत्यापन कराकर उन्हें स्क्रैप कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही विद्यालयों को केवल फिटनेस प्रमाणित वाहनों को ही परिवहन के लिए अनुबंधित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में वाहन चालकों की योग्यता और स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विद्यालयी वाहन चालकों का नियमित नेत्र परीक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। साथ ही उनका पुलिस सत्यापन, ड्राइविंग लाइसेंस का सत्यापन तथा सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। प्रत्येक स्कूल वाहन में प्रशिक्षित अटेंडेंट (सहायक) की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को ऐसे वाहनों से विद्यालय न भेजें, जो सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरते हों। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक रविवार को कम से कम चार विद्यालयों में वाहन चालकों के स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं, ताकि बच्चों का परिवहन पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में हो सके।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राजीव राज, जलशक्ति मंत्री के प्रतिनिधि अरिन्द्र चौहान, सांसद प्रतिनिधि राजीव शर्मा, विधायक कालपी के प्रतिनिधि धर्मेन्द्र सिंह, विधायक सदर के प्रतिनिधि रवीन्द्र प्रताप सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार, समिति के सदस्य तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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