Saturday, October 17, 2026
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न्यायिक कार्य में कथित हस्तक्षेप के आरोपों पर न्यायिक सेवा संघ सख्त, देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के कथित आचरण पर कार्रवाई की मांग

उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने देवीपाटन मंडल की आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल पर गोंडा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान के न्यायिक कार्य में कथित हस्तक्षेप के मामले को गंभीरता से लिया है। संघ ने मामले में राज्य सरकार से उचित कार्रवाई की मांग करते हुए न्यायिक अधिकारियों की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा सुनिश्चित करने की अपील की है। संघ की ओर से इस संबंध में 26 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है।

संघ ने अपने प्रतिनिधित्व में समाचार रिपोर्टों, सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के एक आदेश का हवाला दिया है। पत्र में एक लंबित सिविल वाद को लेकर मंडलायुक्त और न्यायिक अधिकारी के बीच हुई कथित फोन बातचीत का भी उल्लेख किया गया है।

लंबित मुकदमे को लेकर बातचीत का आरोप

न्यायिक सेवा संघ के अनुसार, मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने लंबित सिविल वाद के संबंध में सिविल जज शबीना खान से कथित तौर पर फोन पर बातचीत की। संघ का आरोप है कि बातचीत के दौरान स्वयं को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बताते हुए न्यायिक अधिकारी पर मामले को लेकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। संघ के मुताबिक कथित बातचीत में हाईकोर्ट में शिकायत करने और मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित कराने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों का पक्ष और मामले के सभी तथ्यों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन इस प्रतिनिधित्व में उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सका है। संघ ने इन्हीं आरोपों के मद्देनजर उचित स्तर पर कार्रवाई की मांग की है।

24 अगस्त को ऑनलाइन बैठक में लिया गया निर्णय

मामले की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के पदाधिकारियों की 24 अगस्त 2026 को ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद संघ ने कथित आचरण की निंदा करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

संघ ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय प्रणाली का मूल आधार है। कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का पृथक्करण भी इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों द्वारा लंबित मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता को किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

 

प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए स्पष्ट निर्देश की मांग

न्यायिक सेवा संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लंबित न्यायिक मामलों में किसी न्यायिक अधिकारी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दबाव न बनाया जा सके। संघ ने न्यायिक कार्यवाही अथवा फैसलों को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

इसके साथ ही संघ ने न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को न्यायिक कार्य से जुड़े मामलों में किसी प्रकार के दबाव या उत्पीड़न से सुरक्षा देने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था किए जाने की मांग की है।

न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता पर जोर

संघ ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों की गरिमा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा बेहद जरूरी है। संघ का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए न्यायाधीशों को बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्ष होकर न्यायिक कार्य करने का वातावरण मिलना चाहिए।

प्रतिनिधित्व पर उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के महासचिव गुनेंद्र प्रकाश के हस्ताक्षर हैं। पत्र की प्रतियां इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, न्याय एवं विधि परामर्शी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।

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