Friday, November 6, 2026
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वर्षों बाद कालपी के पीलाघाट पर हुई यमुना की महाआरती, भक्ति और जागरूकता का दिखा संगम, हुआ भव्य सुंदरकांड व दीपदान महोत्सव

जालौन जिले कालपी के प्राचीन मां बनखंडी देवी मंदिर परिसर स्थित पीला घाट पर सोमवार की शाम श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां भव्य सुंदरकांड पाठ एवं दीपदान महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य न केवल मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करना था, बल्कि यमुना नदी की पवित्रता और संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता पैदा करना भी था। कार्यक्रम का नेतृत्व मंदिर के महंत जमुना दास महाराज ने किया, जबकि आयोजन की मुख्य ज़िम्मेदारी तिरंगा अगरबत्ती के प्रोपराइटर नरेंद्र शर्मा द्वारा निभाई गई। कालपी नगर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले से भारी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य कार्यक्रम का हिस्सा बने।

 

महा आरती में उपस्थित रावतपुरा सरकार, बनखंडी देवी मंदिर के महंत और अन्य श्रद्धालु

शाम ढलते ही यमुना तट पर भक्तिरस की धारा बहने लगी। सुंदरकांड पाठ के दौरान गूंजती मंगल ध्वनियों और आरती की स्वर लहरियों ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। इसके बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पवित्र यमुना मां के चरणों में दीपदान किया। जलती हुई दीपशृंखलाओं से पीला घाट स्वर्णिम आभा से निखर उठा और यमुना की लहरों पर तैरते दीपकों ने एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया।

यमुना में दीपदान करते महंत और तिरंगा अगरबत्ती के प्रोपराइटर पंडित नरेंद्र शर्मा और श्रद्धालु

इस अवसर पर महंत जमुना दास महाराज ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यमुना नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आस्था और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि यमुना को प्रदूषित नहीं होने देंगे। उन्होंने प्लास्टिक, पूजा सामग्री, रसायनों और गंदे पानी को नदी में न बहाने की अपील की। महंत ने कहा कि गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी, सरस्वती और मंदाकिनी जैसी नदियां हमारी सनातन विरासत हैं, जिन्हें संरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम केवल आस्था का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का माध्यम भी हैं। जब लोग नदी की महत्ता समझेंगे, तभी इन पवित्र नदियों को बचाने की पहल सफल होगी।

महोत्सव में अयोध्या से आए रामदिनेशाचार्य सहित संत समाज की बड़ी उपस्थित रही। कार्यक्रम के आयोजक पंडित नरेंद्र शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी यह संदेश जाता है कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और नदियों का संरक्षण कितना महत्वपूर्ण है।

 

यमुना की महाआरती के आयोजक तिरंगा अगरबत्ती के प्रोपराइटर पंडित नरेंद्र शर्मा

कार्यक्रम में धर्मेंद्र सिंह चौहान, कौमल ठाकुर, शशिकांत सिंह चौहान, सुबोध द्विवेदी, नीतू गुप्ता, पवनदीप निषाद, नरेंद्र कुमार तिवारी, मनीष पांडे, गुड्डू शुक्ला सहित नगर एवं जिले के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

यमुना तट पर हुआ यह दिव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता के संकल्प का भी मजबूत संदेश देकर सम्पन्न हुआ।

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