जालौन की उरई तहसील में में तैनात ज्वाइंट मजिस्ट्रेट (न्यायिक) IAS रिंकू सिंह राही की कार्यशैली और आचरण को लेकर उत्तर प्रदेश शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नियुक्ति अनुभाग-5 की ओर से 20 अगस्त 2026 को जारी नोटिस अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-10(2) के तहत जारी किया गया है। शासन ने राही से नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब न मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिए जाने की बात कही गई है।
शासन की ओर से जारी नोटिस में जिलाधिकारी जालौन के पत्र और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) तथा अपर पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रस्तुत आख्या का हवाला दिया गया है। इसमें रिंकू सिंह राही के विरुद्ध विभिन्न संघों, अधिवक्ताओं, अधिकारियों-कर्मचारियों और अन्य लोगों की ओर से की गई शिकायतों का उल्लेख किया गया है। शासन ने जांच में सामने आए तथ्यों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए उनके कृत्यों को अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 के नियम-3 के उल्लंघन से जोड़ा है।
नोटिस के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को रिंकू सिंह राही कलेक्ट्रेट में आवंटित चैम्बर और न्यायालय कक्ष के बावजूद बिना अनुमति फर्नीचर आदि लेकर नव निर्मित तहसील सदर उरई पहुंच गए थे। वहां मीडिया को बुलाकर हंगामा और धरना करने का आरोप लगाया गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा लिखित रूप से यह अवगत कराए जाने के बाद कि उनका न्यायालय और चैम्बर कलेक्ट्रेट में ही आवंटित है और वहीं से न्यायिक कार्य करने हैं, वह रात करीब नौ बजे वापस कलेक्ट्रेट लौटे।
नगर पालिका की जांच को लेकर भी उठे सवाल
शासन के नोटिस में नगर पालिका परिषद उरई से संबंधित एक जांच का भी उल्लेख है। आरोप है कि जांच के लिए गठित समिति में रिंकू सिंह राही को सदस्य नामित किया गया था, लेकिन समिति के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की मौजूदगी के बिना उन्होंने 29 जुलाई को बड़ी संख्या में निजी लोगों और मीडिया के साथ नगर पालिका पहुंचकर लाइव जांच की।
नोटिस में करीब 20-25 अनाधिकृत व्यक्तियों और 70-80 अन्य लोगों के साथ पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इस दौरान दस्तावेजों को निजी व्यक्तियों के माध्यम से स्कैन कराए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शासन ने यह भी कहा है कि जांच समिति के माध्यम से कार्रवाई किए जाने के बजाय अधिकारी द्वारा अपने स्तर से विभिन्न पत्र जारी किए गए तथा मूल शिकायत और जांच आदेश की सीमा से बाहर अभिलेख एवं सूचनाएं मांगी गईं। पुलिस बल, लाइव टेलीकास्ट और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं से संबंधित मांग किए जाने का भी नोटिस में उल्लेख है।
अधिवक्ताओं की शिकायतों और न्यायालय बहिष्कार का भी जिक्र
नोटिस में डिस्ट्रिक्ट जालौन बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ताओं की ओर से जुलाई में दिए गए प्रार्थना पत्रों का भी हवाला दिया गया है। इसमें राही की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर शिकायत किए जाने तथा अधिवक्ताओं द्वारा उनके न्यायालय का बहिष्कार किए जाने का उल्लेख है। शिकायतों में कथित तौर पर अधिवक्ताओं से कठोर भाषा में बात करने और धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। साथ ही न्यायालय में सुनवाई के बाद आदेश पारित न किए जाने का आरोप भी शिकायतों में शामिल बताया गया है।
अधीनस्थों से व्यवहार को लेकर भी शिकायतें
नोटिस में जालौन तहसील में तैनाती के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। उपजिलाधिकारी जालौन की आख्या के अनुसार, नायब तहसीलदार, लेखपाल, नायब नाजिर और अन्य लोगों ने रिंकू सिंह राही के कार्यकाल के दौरान उनके व्यवहार एवं कार्यशैली को लेकर शिकायतें की थीं। आरोप है कि अधीनस्थों के साथ अमर्यादित एवं अपमानजनक व्यवहार से कार्यालय का माहौल प्रभावित हुआ और कर्मचारियों में तनाव की स्थिति बनी।
इसके अलावा नागरिक सेवाओं से जुड़े प्रमाण पत्रों को लंबित रखने, प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक देरी तथा आम नागरिकों और अधिवक्ताओं के साथ कथित कठोर व्यवहार का भी नोटिस में उल्लेख किया गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी शासन ने जताई आपत्ति
शासन ने रिंकू सिंह राही की सोशल मीडिया गतिविधियों को भी नोटिस का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा विभिन्न शासन स्तरीय अधिकारियों को संबोधित पत्र और प्रशासनिक विषयों से संबंधित सामग्री सोशल मीडिया पर सार्वजनिक की जाती रही, जिससे प्रशासनिक कार्यवाही को लेकर एकपक्षीय धारणा बनने और आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना रहती है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि शासन की योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की सार्वजनिक आलोचना तथा सोशल मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन के विरुद्ध कथित नैरेटिव तैयार करने संबंधी शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं।
शासन ने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि राही द्वारा पूर्व में व्हाट्सएप चैट के माध्यम से अपने आचरण एवं कार्यप्रणाली से संबंधित कुछ त्रुटियों को स्वीकार करते हुए भविष्य में सुधार का आश्वासन दिया गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट के अनुसार अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।
अब शासन ने पूरे मामले में रिंकू सिंह राही से 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। जवाब मिलने के बाद शासन उपलब्ध अभिलेखों और मामले के गुण-दोष के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।







