उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और मानदेय व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार प्रदेश के विभिन्न विभागों में करीब 1 लाख नए आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने की तैयारी में है। वहीं, पहले से कार्यरत 2.75 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में 8 से 15 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी किए जाने की तैयारी है। इसके लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम को इसी महीने सक्रिय किए जाने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निगम के कामकाज की शुरुआत का उद्घाटन कर सकते हैं।
अब विभाग नहीं, निगम करेगा एजेंसी का चयन
नई व्यवस्था के तहत सरकारी विभाग सीधे आउटसोर्स एजेंसियों का चयन नहीं कर सकेंगे। विभागों को अपनी जरूरत के मुताबिक कर्मचारियों की संख्या, नए पदों की आवश्यकता और मानदेय का पूरा विवरण उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम को देना होगा। इसके बाद निगम GeM पोर्टल के माध्यम से एजेंसी का चयन करेगा। सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के साथ कर्मचारियों के शोषण की शिकायतों पर अंकुश लगाना है।
हर महीने 5 तारीख तक मिलेगा मानदेय
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय हर महीने की 5 तारीख तक उनके बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान किया जा रहा है। यदि संबंधित वेंडर कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। लगातार तीन या उससे अधिक बार शिकायत सही पाए जाने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
कर्मचारियों से महीने में 26 दिन काम लेने और साप्ताहिक अवकाश देने का प्रावधान रहेगा। कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव की सुविधा भी मिलेगी।
PF, ESI और बीमा की भी मिलेगी सुविधा
आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय के साथ 13 प्रतिशत EPF और 3.25 प्रतिशत ESI की राशि समय से जमा कराने की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। इसके अलावा कर्मचारियों को मेडिक्लेम और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं देने की व्यवस्था होगी।
सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 15 हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है।

लिखित परीक्षा और इंटरव्यू से होगा चयन
नई भर्तियों में कर्मचारियों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किए जाने की तैयारी है। आरक्षण व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान रहेगा।
वहीं, सरकारी विभागों में पहले से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को अचानक हटाने की योजना नहीं है। टेंडर की शर्तों के अनुसार उनकी सेवाएं जारी रखने की व्यवस्था की जाएगी।
इन 10 विभागों में सबसे ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी
1. नगरीय निकाय
2. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
3. चिकित्सा शिक्षा
4. ऊर्जा
5. परिवहन
6. महिला एवं बाल कल्याण
7. कृषि
8. औद्योगिक विकास
9. एमएसएमई
10. श्रम विभाग
पुरानी शिकायतों पर भी लगेगा अंकुश
आउटसोर्स कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से वेंडर एजेंसियों को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें नौकरी देने से पहले एक-दो महीने का मानदेय एडवांस में लेना, मानदेय का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा वापस लेने का दबाव, मनमाने तरीके से नियुक्तियां करना और बिना नोटिस नौकरी से हटाने जैसी शिकायतें शामिल हैं।
कई मामलों में कर्मचारियों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरित करने और वेंडर व अधिकारियों की मिलीभगत से नियुक्तियां करने के आरोप भी लगते रहे हैं। नई व्यवस्था में निगम के जरिए इन शिकायतों पर निगरानी रखने की तैयारी है।
पिछले साल हुआ था निगम का गठन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए निगम बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद पिछले साल सितंबर में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया गया और IAS अधिकारी अमृता सोनी को निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया। सचिवालय प्रशासन विभाग को निगम का नोडल विभाग बनाया गया है।
निगम के लिए पिकप बिल्डिंग में कार्यालय तैयार किया जा रहा है। गठन के करीब एक साल बाद अब सरकार इसे इसी महीने से पूरी तरह सक्रिय करने की तैयारी में है।
426 करोड़ बढ़ाया गया बजट, निगम के लिए 20 करोड़ मंजूर
सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय से जुड़े बजट में 426 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की थी और 2223.84 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इसके अलावा यूपी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के संचालन के लिए 20 करोड़ रुपये शून्य ब्याज दर पर उपलब्ध कराने की मंजूरी दी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और एजेंसियों की जवाबदेही से जुड़ी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकेगी।






