जालौन जिला बार संघ के तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग एक बार फिर जोर-शोर से उठाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने क्षेत्र के विकास, रोजगार और संसाधनों के समुचित उपयोग का मुद्दा उठाते हुए अलग बुंदेलखंड राज्य के गठन की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान सभागार “बुंदेलखंड राज्य दो, वोट लो” और “बहुत सहा, अब नहीं सहेंगे” जैसे नारों से गूंज उठा।
अपने संबोधन में गंगाचरण राजपूत ने कहा कि बुंदेलखंड प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र है और यहां से सरकार को खनन के माध्यम से भारी राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद क्षेत्र आज भी विकास, रोजगार, सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में यहां के युवाओं को दिल्ली, मुंबई, गुजरात सहित अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
उन्होंने नमामि गंगे योजना का उल्लेख करते हुए योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कई गांवों में पेयजल परियोजनाओं के तहत नल तो लगाए गए हैं, लेकिन लोगों को नियमित पानी की आपूर्ति नहीं मिल रही है।
पूर्व सांसद ने दावा किया कि अब पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग जनआंदोलन का रूप ले चुकी है और इसे अधिक समय तक दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “या तो प्रांत बनेगा या गंगाचरण के प्राण निकलेंगे।” साथ ही उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि जब तक सरकार पृथक राज्य के गठन की दिशा में ठोस पहल नहीं करती, तब तक इस मुद्दे को चुनाव में प्रमुखता से उठाया जाए।
कार्यक्रम में अधिवक्ताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान बुंदेलखंड के विकास, रोजगार, सिंचाई, पेयजल और क्षेत्रीय समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा पृथक राज्य की मांग को लेकर समर्थन जताया गया।






