Wednesday, August 26, 2026

भाभी की हत्या करने वाले देवर को उम्र कैद की सजा, 18 माह पहले दुष्कर्म में नाकाम होने पर कर दी थी हत्या, जला दिया था शव

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जालौन में 18 माह पहले दुष्कर्म में नाकाम होने पर एक युवक ने अपनी भाभी की बेरहमी से हत्या कर दी थी, साथ ही शिनाख्त मिटाने के लिए उसके शव को जला दिया था, इस मामले में सोमवार को जालौन के न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम द्वारा साक्ष्य और गवाहों के आधार पर युवक को दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही न्यायालय ने उस पर 53 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

इस मामले की पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ता मोतीलाल पाल ने बताया कि नदीगांव थाना क्षेत्र के कुरचौली निवासी सतीश शर्मा पुत्र मुरारी लाल शर्मा ने पुलिस को 8 जनवरी 2023 को शाम करीब 7.30 मिनिट कर शिकायती पत्र देते हुए बताया कि 8 जनवरी 2023 को उसकी पत्नी पूजा शुगर की बीमारी की दवा लेने ग्वालियर अपनी दोनों बेटियो के साथ जाना चाहती थी और वह अपनी दोनों बेटियों के साथ दवा लेने के लिए ग्वालियर जाने के लिए निकली।

उसी दौरान पीछे से उसका छोटा भाई अविनाश उर्फ नीतू पुत्र मुरारी लाल शर्मा आ गया और उसने लड़कियों से कहा कि वह घर चली जाए में भाभी को बस में बैठा दूंगा, उसकी पत्नी के कहने पर दोनों बेटियां घर चली गई, जब वह घर से खेत पर जा रही थी, तो देखा कि सड़क किनारे उसका भाई अविनाश और पिता मुरारीलाल पत्नी पूजा शर्मा की धारदार हथियार से हमला कर रहा है और उसे जलाने का प्रयास कर रहा है, जब बेटियां गई तो दोनों मौके से भाग गए, और इस दौरान पत्नी पूजा की मौत हो गई, पुलिस ने शिकायत पर शिकायतकर्ता की भाई अविनाश और पिता मुरारी के खिलाफ हत्या और अक्षय मिटाने का मुकदमा पंजीकृत कर लिया, जिसमें दूसरे दिन अविनाश को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया, इस दौरान पुलिस ने जांच की तो मुरारी के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिला जिस पर पुलिस ने उसका नाम हटाते हुए आरोपी अविनाश के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।

18 माह तक अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम शिवकुमार की अदालत में चले ट्रायल के बाद सोमवार को इस मामले की सुनवाई पूरी हुई, जिसमें दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा बहस की गई और गवाहों के बयान और सबूत पेश किए गए, जिसके आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम शिवकुमार ने अविनाश उर्फ नीतू शर्मा को भाभी की हत्या का दोषी पाते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई और 53 हजार रूपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना पड़ेगा।

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