जालौन के रामपुरा थाना क्षेत्र में मिट्टी खनन और परिवहन के दौरान शुक्रवार को दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम नगरा के पास कस्बा मोड़ पर दोपहर करीब एक बजे मिट्टी से भरा ओवरलोड ट्रैक्टर पलट गया। हादसे में चालक ट्रैक्टर के नीचे दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में चल रहे मिट्टी खनन के तौर-तरीकों और खनन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि खनन की अनुमति किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ली गई थी, उसमें दर्ज मोबाइल नंबर अलग व्यक्ति का था, जबकि ई-मेल आईडी वरुण के नाम से जुड़ी बताई जा रही है। इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच होने पर ही अनुमति लेने और खनन कराने के पीछे की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

जानकारी के अनुसार, रामपुरा थाना क्षेत्र के रामपुरा जागीर-नगरा इलाके में मिट्टी खनन का काम चल रहा था। बताया गया कि खनन के लिए कैलाश पुत्र श्यामलाल के नाम से अनुमति ली गई थी। आरोप है कि अनुमति संबंधी दस्तावेजों में दर्ज मोबाइल नंबर कैलाश का नहीं था, जबकि इस्तेमाल की गई ई-मेल आईडी इंडिया टीवी वरुण के नाम से जुड़ी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अनुमति किसके कहने पर ली गई और खनन स्थल पर वास्तव में काम कौन करा रहा था। इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग की जांच जरूरी है।
इसी दौरान रामपुरा थाना क्षेत्र के सुभाष नगर निवासी विनोद कुमार (40) पुत्र बलिराम महिंद्रा 365 डीआई एक्सपी प्लस ट्रैक्टर से मिट्टी लेकर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि ग्राम नगरा के पास कस्बा मोड़ पर ढलान चढ़ते समय ट्रैक्टर के प्रेशर पाइप में खराबी आ गई, जिससे वाहन असंतुलित होकर पलट गया। ट्रैक्टर पर मिट्टी अधिक मात्रा में लदी होने की बात भी सामने आई है। हादसे में विनोद उसके नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर रामपुरा थाना पुलिस पहुंची और लोगों की मदद से चालक को ट्रैक्टर के नीचे से निकलवाया। उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुरा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के कारणों और ओवरलोडिंग की स्थिति की जांच से घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
वरुण पर खनन कराने के आरोप, अनुमति की जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि रामपुरा क्षेत्र में मिट्टी खनन का काम एक न्यूज़ चैनल के पत्रकार वरुण द्विवेदी के प्रभाव में संचालित हो रहा है। आरोप है कि अनुमति किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर लेकर वास्तविक खनन दूसरे स्थान पर कराया जाता है। कैलाश के नाम पर अनुमति, अलग मोबाइल नंबर और वरुण के नाम से जुड़ी ई-मेल आईडी का मामला सामने आने के बाद इन आरोपों की गंभीरता बढ़ गई है। हालांकि, अनुमति के वास्तविक उपयोग, खनन स्थल और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि सरकारी अभिलेखों की जांच से ही हो सकेगी।

यह भी आरोप है कि माधौगढ़ तहसील प्रशासन को क्षेत्र में हो रहे खनन की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सवाल यह है कि अनुमति में दर्ज स्थान पर ही खनन कराया जा रहा था या निर्धारित क्षेत्र से बाहर मिट्टी निकाली जा रही थी। यदि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार लोगों के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
बता दे कि तत्कालीन जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय के कार्यकाल में वरुण द्विवेदी से जुड़े खनन मामले में कार्रवाई की गई थी। उस समय उनकी जेसीबी मशीन जब्त किए जाने और ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई थी। अब उनके स्थानांतरण के बाद दोबारा खनन गतिविधियां शुरू होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित कार्रवाई के अभिलेखों और वर्तमान खनन अनुमति की जांच से की जानी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि वरुण द्विवेदी कथित तौर पर एक बड़े न्यूज चैनल का हवाला देकर अधिकारियों पर प्रभाव बनाने की कोशिश करते हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह किसी भी व्यक्ति के प्रभाव या पहचान से परे जाकर तथ्यों के आधार पर जांच करे।
हादसे ने खड़े किए कई सवाल
विनोद कुमार की मौत ने मिट्टी खनन की अनुमति, ओवरलोड परिवहन, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक अपने पीछे पत्नी सोना देवी, 12 वर्षीय बेटी दीपिका, नौ वर्षीय बेटी रितिका और छह वर्षीय बेटे उत्कर्ष को छोड़ गए हैं। उनके पिता बलिराम का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में कमाने वाले सदस्य की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन, खनन विभाग और तहसील प्रशासन अनुमति के दस्तावेजों, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर, वास्तविक खनन स्थल तथा ट्रैक्टर पर लदी मिट्टी की मात्रा की जांच कराते हैं या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि हादसे में ओवरलोडिंग अथवा तकनीकी खराबी की क्या भूमिका रही। निष्पक्ष जांच से ही यह सामने आ सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और यदि खनन नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।






