झांसी-जालौन लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि के मुआवजे को लेकर किसानों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को ग्राम काबिलपुरा, तिमरो और फूलपुरा के किसानों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को ज्ञापन सौंपा और भूमि का सर्किल रेट बढ़ाने के साथ-साथ वर्तमान दरों का पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा नहीं मिला तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
ज्ञापन में किसानों ने बताया कि वर्तमान में प्रशासन द्वारा निर्धारित सर्किल रेट वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम है। उनका कहना है कि पिछले लगभग नौ वर्षों से सर्किल रेट में अपेक्षित संशोधन नहीं किया गया है, जबकि इस दौरान क्षेत्र में जमीनों की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई है। किसानों के अनुसार उनकी कृषि भूमि का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 30 लाख रुपये प्रति एकड़ है, लेकिन अधिग्रहण के लिए निर्धारित मुआवजा इस मूल्य से काफी कम है।
किसानों ने यह भी कहा कि उनकी भूमि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और प्रस्तावित झांसी-जालौन लिंक एक्सप्रेस-वे के निकट स्थित है। इन परियोजनाओं के कारण क्षेत्र का महत्व तेजी से बढ़ा है और भूमि का व्यावसायिक एवं औद्योगिक मूल्य भी काफी बढ़ चुका है। ऐसे में पुराने सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा तय करना किसानों के साथ अन्याय होगा।
किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला तो वे समान मूल्य की दूसरी कृषि भूमि खरीदने में सक्षम नहीं होंगे, जिससे उनके सामने भूमिहीन होने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भूमि का पुनर्मूल्यांकन वर्तमान बाजार दरों के अनुरूप कराया जाए और किसानों को न्यायसंगत एवं उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे किसानों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजेगा। किसानों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि उचित मुआवजा मिलने पर ही वे अपनी भूमि अधिग्रहण के लिए सहर्ष उपलब्ध कराएंगे।





