सनातन संस्कृति के संरक्षण और भारतीय जीवन मूल्यों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से जिले के विभिन्न विद्यालयों में 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। यह आयोजन परम पूज्य संत आशाराम बापू की प्रेरणा से वर्ष 2014 से प्रारंभ होकर आज एक वैश्विक स्वरूप ले चुका है। इसी क्रम में श्री योग वेदांत सेवा समिति के तत्वावधान में जिले भर के सैकड़ों विद्यालयों में तुलसी माता का विधिवत पूजन, दीप प्रज्वलन, भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं।

समिति के अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल ने बताया कि तुलसी माता को भारतीय परंपरा में पुण्य प्रदायिनी माना गया है और इसके धार्मिक, आयुर्वेदिक तथा पर्यावरणीय महत्व पर सदियों से बल दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है और बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों व प्राकृतिक संरक्षण के प्रति जागरूक करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने तुलसी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कारों से इसके संबंध की चर्चा की।
इस व्यापक अभियान के तहत जिले के लगभग एक लाख से अधिक विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रमुख रूप से मिलेनियम वर्ल्ड स्कूल, राधा कृष्ण सरस्वती विद्यालय, सरस्वती विद्या मंदिर, विनायक एकेडमी, आचार्य नरेंद्र देव विद्यालय, उरई इंटरनेशनल स्कूल, मदर टेरेसा स्कूल सहित अनेक शिक्षण संस्थानों में आयोजन सम्पन्न हुए। विद्यार्थियों ने तुलसी पूजन के साथ-साथ निबंध, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से अपील की कि वे तुलसी के संरक्षण के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाए ताकि भावी पीढ़ी संस्कारवान और प्रकृति-संवेदनशील बन सके।




