जालौन के नगर मथुरा प्रसाद महाविद्यालय के रिटायर्ड लिपिक बृजेंद्र मिश्रा की बड़ी पुत्री निहारिका मिश्रा ने संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे कोंच नगर में खुशी की लहर है। शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
निहारिका ने श्री जेजेटी विश्वविद्यालय, झुंझुनू (राजस्थान) से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध कार्य प्रसिद्ध शोध निर्देशिका डॉ. रंजना सक्सेना के मार्गदर्शन और गुरु डॉ. ऋषि मिश्रा के सानिध्य में पूरा हुआ।

निहारिका ने अपने शोध का विषय “कर्नाटक राज्य के शास्त्रीय संगीत गायकों एवं वादकों का हिंदुस्तानी संगीत के विकास में योगदान” चुना, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो प्रमुख धाराओं—कर्नाटक और हिंदुस्तानी संगीत—के पारस्परिक प्रभाव और योगदान को रेखांकित करता है। इस विषय पर किए गए उनके शोध को विश्वविद्यालय द्वारा सराहा गया और ललित कला संकाय की डीन डॉ. अंजू सिंह तथा रजिस्ट्रार डॉ. अजीत कस्वां ने उन्हें औपचारिक रूप से पीएचडी की उपाधि प्रदान की।

निहारिका की प्रारंभिक शिक्षा कोंच के नाथूराम पुरोहित बालिका इंटर कॉलेज से हुई, जहां उन्होंने माध्यमिक शिक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने प्रभाकर, बीए और एमए एमपीडीसी से उत्कृष्ट अंकों के साथ पूरा किया। आगे की पढ़ाई में उन्होंने डीवी कॉलेज उरई से इतिहास और संगीत विषय में डबल एमए की उपाधि प्राप्त की।
संगीत के क्षेत्र में उनकी रुचि बचपन से ही रही है। उनके संगीत गुरु ग्यासीलाल याज्ञिक, डॉ. प्रभा त्रिपाठी और वीणा सक्सेना ने उनके संगीत कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुरुजनों के मार्गदर्शन और अपनी लगन के बल पर नीहारिका ने संगीत शोध के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
निहारिका की इस सफलता पर शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और नगरवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि कोंच के लिए गर्व की बात है और इससे क्षेत्र की अन्य छात्राओं को भी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।





