किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने सोमवार से जालौन जिले के कालपी तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आटा-दाल और जरूरी घरेलू सामान लेकर रात के अंधेरे में टेंट लगाकर बैठे किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने में कालपी क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और अन्य वाहनों से पहुंचे।
धरना प्रदर्शन की अगुवाई भाकियू के तहसील अध्यक्ष अजय पाल सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते दिनों यमुना नदी की बाढ़ और अधिक वर्षा से किसानों की खरीफ की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं, लेकिन अब तक कई गांवों के किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने मांग की कि दैवीय आपदा से हुई फसल क्षति का मुआवजा प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दिया जाए।
किसानों ने फसल बीमा को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बैंकों द्वारा किसानों के खातों से बीमा प्रीमियम काट लिया गया, बावजूद इसके जब फसलें शत-प्रतिशत नष्ट हो गईं, तब बीमा कंपनियों ने अभी तक उचित मुआवजा नहीं दिया। जिन किसानों को राशि मिली भी है, वह बेहद कम है। किसानों ने तत्काल कम से कम 20 प्रतिशत बीमा राशि दिए जाने की मांग उठाई।
धरने में किसानों ने लेखपालों पर भी गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि जमीन बंटवारे और खतौनी में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है, जिससे किसान महीनों से तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं। एमएसपी क्रय केंद्रों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि सरकारी केंद्रों पर किसानों का अनाज न खरीदकर व्यापारियों का अनाज खरीदा जा रहा है, जिससे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मंडियों में भटक रहे हैं।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी किसानों ने रोष व्यक्त किया। किसानों का आरोप है कि पूरे दिन में महज तीन घंटे बिजली मिल रही है और लो-वोल्टेज के कारण रबी की फसलें सूखने की कगार पर हैं। उन्होंने सिंचाई के लिए 18 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति, गलत बिजली बिलों में सुधार और नलकूपों की शीघ्र मरम्मत की मांग की।
इसके अलावा नहरों-माइनरों की सफाई, खाद-बीज उचित दर पर उपलब्ध कराने, कालाबाजारी पर रोक और अन्ना पशुओं की समस्या के समाधान की भी मांग उठाई गई। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी सभी जायज मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन तहसील अध्यक्ष,अजय पाल सिंह ने बताया कि किसान पूरी तरह से टूट चुका है। अगर प्रशासन ने हमारी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता।”




